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Nimra ki kahani ,part 2










        यह भाग निमरा की कहानी का दूसरा भाग है इसमें निमरा का कॉलेज टाइम शुरू होता है जिसमें वह अपने दोस्त बनाती है और दोस्तों से अपनी लाइफ शेयर करती है दोस्तों को अपने साथ घर ले कर जाती है अपने मां के बारे में बताती है निमरा का कॉलेज जाना उसकी मामी को अच्छा नहीं लगता उसे ऐसा लगता है लड़कियों को बस थोड़ा ही पढ़ना चाहिए जब पैसा खर्च होता है निमरा के ऊपर तो उसे तकलीफ होती है वह बर्दाश्त नहीं कर पाती और निमरा के मामा को चढ़ाती रहती है निमरा की तरफ से ,लेकिन अभी निमरा अट्ठारह की नहीं हुई जो उसकी शादी करा दी जाए ,,मानो निमरा के घर में इस बात का इंतजार हो रहा है कि जल्दी से बड़ी हो जाए और इसकी शादी करा दी जाए और निमरा के भाई बड़े हो जाए उसकी मां को घर से निकाल दिया जाए पर वक्त से पहले कुछ नहीं होता वक्त का इंतजार तो सभी को करना पड़ता है उन्होंने भी किया।

        कुछ टाइम बाद निमकी मामी उसे परेशान करना शुरू कर देते हैं उसे पढ़ने नहीं देती घर का सारा काम कराती है और परेशान करती है निमरा की मां भी कुछ नहीं कह सकती क्योंकि वह अपने मायके में रहती है और वो नीमरा को समझाती है के अपनों से बड़ों का काम कर दिया करते हैं कोई बात नहीं होती निमरा का सारा दिन ऐसी गुजर जाता है थोड़ा बहुत पड़ती है उसकी मामी यों का गलत व्यवहार उसके और उसकी मां के साथ उसकी दिल में जगह खत्म कर रहा था अपनों की धीरे धीरे निमरा बड़ी होती गई उसके मामा उसके लिए एक रिश्ता ढूंढ लेते हैं ज्यादा कुछ सोच विचार नहीं होता झटपट उसकी शादी करा दी जाती है शादी के बाद का जीवन तो निमरा को ही हैंडल करना था 12वीं की परीक्षा देने के बाद तुरंत उसकी शादी करा दी जाती है वह पहले मामा के घर में परेशानियों का सामना करती थी और अब ससुराल में जाकर भी उसे परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।

        अपने ससुराल आ जाती है निमरा की जिंदगी धीरे धीरे और बदलने लगती है। अपने पति से भी उसे सुख नहीं मिल वह भी सुबह का जाता है और शाम को आता है काम करके थक जाता है और अपनी बीवी को सताता है निमरा की जिंदगी ऐसे ही चलने लगती है निमरा को बेटी होती है और बेटी का मुंह देख कर ससुराल के लोग एक आंख नहीं सुहाती निमरा को, और पानी देने लगते हैं (औलाद तो आदमी की नसीब से होती है औरत के नहीं यह बात उन्हें समझ नहीं आई इसलिए वह दूसरों को कसूरवार ठहराते हैं) कुछ टाइम बाद निमरा का पति शराब पीने लगता है और निमरा पर जुल्म करने लगता है।
     (जब निमरा के भाई बड़े हो जाते हैं इसी दौरान तो उसकी मां उसके भाइयों को लेकर अलग घर में चली जाती है)
           अब निमरा की जिंदगी ऐसी है चल रही है जिंदगी में कोई सुख नहीं ,और वह कुछ नहीं कर सकती , क्योंकि वह इतनी पढ़ी-लिखी नहीं है आत्मनिर्भर नहीं है। वह करे तो क्या करें अपने बच्चों को कैसे पाले अगर अपने पति को छोड़ भी दे, उसका पति उसे पैसे नहीं देता घर चलाने के लिए ,सताता था और मारता था खाने को रोटी नहीं देता था इन सब बातों से परेशान होकर निमरा अपने मायके जाकर रहने लगती है।
  (लेकिन ऐसा कब तक चलेगा आखिरकार निमरा को कोई कदम तो उठाना पड़ेगा ।अपने हक में ,अपने बच्चों के हक में जिससे वह जिंदगी जी पाए और उसके बच्चे खुलकर जी पाए, पढ़े लिखे और जिंदगी में आगे बढ़ पाए।)
          इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि बेटियों को बढ़ावा देना चाहिए आत्मनिर्भर रहने के लिए उनका साथ देना चाहिए उनके ख्वाहिशों के लिए उनकी हर ख्वाहिश पूरी करनी चाहिए उनको उनके जीवन में कभी नहीं रुकना चाहिए क्योंकि पढेंगी लड़कियां तभी तो बढ़ेंगी लड़कियां।

***Nishat fatma***
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