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भीमा और गुल्ली की प्रेम कहानी
यह कहानी एक छोटे से गांव की है जहां पर 2 परिवार रहते हैं एक परिवार भीमा का है जो जमीदारों के खानदान से है और दूसरा परिवार गुल्ली का है जो गरीब किसान के घर में रहती है गुल्ली के परिवार में उसकी एक मां और उसकी बहन है उसके पिता का देहांत हो चुका है। और भीम के परिवार में उसके पिता उसकी मां उसकी भाभी उसका भाई रहते हैं यह कहानी भीमा और गुल्ली की है गुल्ली ,भीमा से प्रेम करती है इनकी कहानी गांव से ही शुरू हुई दोनों छुप-छुपकर गांव में ही मिला करते थे बाग -बगीचों में या फिर कहीं पर भी।
एक बार जब भीमा और गुल्ली मिले तो भीमा ने गुल्ली से पूछा :
भीमा: तू मेरे लिए क्या कर सकती है?
गुल्ली: मैं तेरे लिए सब कुछ कर सकती हूं तू कह कर तो देख मैं आंखें बंद करके वह सब कुछ कर लूंगी जो तू कहेगा ,
(फिर गुल्ली भीमा से पुछती है)
गुल्ली: अच्छा तू बता तु मेरे लिए क्या कर सकता है?
भीमा: कह कर तो देख जान भी दे सकता हूं !
(गुल्ली यह बात सुनकर बोली)
गुल्ली: मैं तेरी जान का क्या करूंगी मुझे तेरा प्यार चाहिए जान नहीं तू अपनी जान अपने पास रख !
भीमा :ठीक है ;
( यह सुनकर भीमा गुल्ली को बाहों में ले लेता है )
गुल्ली : येे तु क्या कर रहा है ,
भीमा :अपनी जान अपने पास रख रहा हूं!
वह दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे एक दिन यह बात गांव में फैल गई और किसी को भी यह बात पसंद नहीं आई , खासकर के भीमा के परिवार वालों को,,, उन्होंने भीमा से मना किया कि तुम एक जमीदारों के खानदान से ताल्लुक रखते हो तुम ऐसी तुच्छ जाति की लड़की से प्रेम कैसे कर सकते हो ,
उधर गुल्ली की माँ ने भी गुल्ली को समझाया ,
पर बात कहां समझ में आने वाली थी दोनों के, वह दोनों तो एक दूसरे से प्यार करते थे बात इस कदर आगे बढ़ गई भीमा के परिवार में भीमा के बाप ने उसके ऊपर बंदूक तान दी है उन्हें यह मंजूर नहीं था कि उनके परिवार में किसी नीची जाति की लड़की आई उन्होंने सोचा नाक कटे इससे बेहतर है कि नाक काटने वाले को ही काट दिया जाए जिन्होंने अपने बेटे पर जैसे ही बंदूक तानी भीमा की मां बीच में आ गई और रोकने की कोशिश करने लगी अचानाक गोली वो गोली भीमा की टाग पर लगी,फिर भीमा को बचाते बचाते भीमा की मां को गोली लग जाती है ओर भीमा की माँ मर जाती है माहौल में एकदम बदल जाता है परिवार के लोग परेशान हो जाते हैं क्या हो ,
कुछ टाइम बाद
भीमा को ऐसा लगता है कि मेरा बाप तो मुझे भी मार देगा तो भीमा गुल्ली को लेकर गांव से भाग जाता है ,दोनों एक शहर चले जाते हैं।
कुछ टाइम बाद भीमा का पिता जेल से निकल आता है पैसों के बल पर और दूसरी शादी कर लेता है ।
भीमा और गुल्ली शहर में एक साथ रह रहे होते हैं और शादी कर लेते हैं भीमा का बाप पता करवाता है कि भीमा कहां है।
उधर बीमा की और गुल्ली की शहर में जिंदगी अच्छी बीत रही होती है दोनों एक साथ रहते हैं और दुनिया की परेशानियों का सामना करते हैं।
एक दिन भीमा और गुल्ली बाहर गए हुए थे और जब दोनों वापस घर आते हैं तो देखते हैं कि भीमा का बाप वहां हाथ में एक बड़ी बंदूक लिए खड़ा है वह दोनों भागे इस से पहले भीमा का पिता उन दोनों को मार देता है और उन दोनों की लाश को घर में रखकर मिट्टी का तेल डालकर पूरे घर में आग लगा देता है और चला जाता है।
( इस तरह दो प्रेम करने वालो की ज़िन्दगी खत्म हो जाती है ओर उन की प्रेम कहानी गाँव के हर घर मे प्रसिद्ध हो जाती है भीमा और गुल्ली के नाम से।। )

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